*ट्रांसफार्मर हादसे के बाद संवेदनशील नेतृत्व से उपचार और जवाबदेही सुनिश्चित*
लखनऊ Jan 16, 2026 at 08:45 PM , 109*सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल से पीड़ित बच्चे को उपचार, परिवार को सहायता और दोषियों पर कार्रवाई की मांग*
*लखनऊ:* सार्वजनिक जीवन में सच्चा नेतृत्व केवल वक्तव्यों से नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में त्वरित निर्णय, समन्वित कार्यवाही और मानवीय संवेदनशीलता से परिलक्षित होता है। ऐसा ही उत्तरदायी और संवेदनशील नेतृत्व हाल ही में सरोजिनी नगर क्षेत्र में घटित एक दुखद घटना के बाद देखने को मिला।
दिनांक 11 जनवरी 2026 को सैनिक विहार कॉलोनी, बिजनौर में खुले एवं असुरक्षित विद्युत ट्रांसफार्मर के संपर्क में आने से अर्पित पाल (उम्र 8 वर्ष), पुत्र श्री राकेश पाल, गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद बच्चे के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए के.जी.एम.यू., लखनऊ में चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। अब तक लगभग ₹75,000 की चिकित्सा सहायता विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके साथ ही उनकी टीम के सदस्यों द्वारा रक्तदान कर पीड़ित परिवार को चिकित्सकीय एवं नैतिक सहयोग प्रदान किया गया।
चूंकि पीड़ित परिवार मूल रूप से मोहनलालगंज विधानसभा क्षेत्र का निवासी है, अतः संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा मोहनलालगंज के माननीय विधायक से विधायक निधि से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का औपचारिक अनुरोध किया गया, जिससे बच्चे का उपचार निर्बाध रूप से जारी रह सके।
घटना को केवल एक दुर्घटना मानकर सीमित न रखते हुए, इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार को शासन स्तर से समुचित सहायता एवं मुआवज़ा प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त ऊर्जा मंत्री को भेजे गए पत्र में एफआईआर दर्ज कराने, निष्पक्ष जाँच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई, पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवज़ा देने तथा क्षेत्र में अन्य असुरक्षित ट्रांसफार्मरों की पहचान कर फेंसिंग एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस दिशा में कड़े मानकों का पालन तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
यह घटनाक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि संवेदनशीलता, संवैधानिक दायित्व और प्रशासनिक दृढ़ता के समन्वय से ही पीड़ितों को न्याय, राहत और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।






























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