*दुल्हा बना है आज मौला गदीर मे,रहमत का है,खुला हुआ दरिया गदीर मे*

लखीमपुर खीरी , 23

*मोहम्मदी खीरी,अजुमन.हुसैनिया की जानिब से नकवी हाऊस मे जश्ने गदीर पर एक महफिल आयोजित की गयी,जिसमे आऐ हुऐ शायरों ने कलाम पढे,जिसमे अली अली के नारों से गूज उठा,महफिल देर रात तक चली,महफिल की सदारत मौलाना साहिल अब्बास जैदी पिहानी ने की और महफिल की निजामत अजुमन.हुसैनिया के सदर अब्बास नकवी ने की,महफिल की शुरुआत अशरफ सिददीकी ने नात से की
 जिसमे उन्होंने कहा,
*इन्साफे रिसालत मे ऐसा भी मकाम आया*
*आका की सवारी पर,आका का गुलाम आया*
खूब दाद मिली,उसके बाद महफिल मे फतेहपुर से तशरीफ़ लाऐ युवा शायर माजिद जाफरी ने खूबसूरत तरन्नुम मे शायरी कर खूब वाह वाही लूटी और यू कहा
*मौला जो जिसका मै हूँ,अली मौला उसी के है*
*ऐलान सुनके जो उतारा गदीर मे*
*फर्शय बरी से,अर्शे बरी तक है महफिलें*
*दूल्हा बना है आज मौला गदीर मे*
बिसवा सीतापुर से आऐ शायर सिराज अली सिराज ने कुछ यू कहा
*शेरे खुदा ने लकब इसलिए दिया*
*मौला अली की तेग ने हर जग जीत ली*
*सुन लो यजीदियों ये है,फरमाने मुस्तफा*
*मै सबका मौला हूँ,सबके यही अली*
निजामत कर रहे अब्बास नकवी ने कुछ यू कहा,
*हर सख्स कह रहा है, ये देखो गदीर मे*
*अहमद बना रहे,किसे मौला गदीर मे*

*तस्वीर मुस्तफा की,सभी देखने लगे*
*मन कुंतो मौला,कहके ऐ बोले गदीर मे*
अजफल जैदी महौली ने कुछ इस  अंदाज में अपने शेर कहे
*जन्नत के सभी फरिश्ते बोले ये झूम के*
*दूल्हा बना है आज मेरा मौला गदीर मे*
अशरफ सिददीकी ने जश्ने गदीर पर कुछ यूं कहा,
*दुल्हा बना है आज मौला गदीर मे,रहमत का है,खुला हुआ दरिया गदीर मे*
*,जिस दम नवी ने हाथ उठाकर कहा अली,गूजा था हक के पाक का तराना गदीर मे*
महफिल मे मौलाना साहिल अब्बास,सूफी कमरूल हसन,नायाब सफक,हसन नकवी,जमीर हसन रिजवी ,शाने अली,गाजी मेहदी,जाहिद हुसैन,ने कलाम पढकर खूब वाह वाही लूटी,महफिल को खूबसूरत बनाने मे हसन नकवी,असलम रिजवी,बचछन जैदी,मेराज अली,नजफ अली नकवी ,कुमैल अली नकवी,अर्श अली नकवी,माजिद जाफरी का विशेष सहयोग रहा,महफिल देर रात समाप्त हुई

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