KGMU में करोड़ों के दवा घोटाले की आशंका! कैंसर मरीजों की दवाओं में गंभीर अनियमितताएं, 2 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के संकेत

लखनऊ , 61

KGMU में करोड़ों रुपये के संभावित दवा घोटाले की आशंका।

कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी।

शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की अनियमितता के संकेत।

छह माह में लगने वाले इंजेक्शन को एक माह में 4-5 बार दर्शाने का मामला।

फरवरी-मार्च 2026 में दवा खपत अचानक 40-45 लाख रुपये तक पहुंची।

बिल, प्रिस्क्रिप्शन और ऑडिट में कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।

संबंधित भुगतान पर रोक, जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित।

 

लखनऊ। प्रदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान King George's Medical University (KGMU) में करोड़ों रुपये के संभावित दवा घोटाले की आशंका ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों के उपयोग एवं भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिलने की बात कही जा रही है।

सूत्रों के अनुसार कैंसर रोगियों के उपचार में उपयोग होने वाले कुछ महंगे इंजेक्शनों और दवाओं की खपत का रिकॉर्ड संदिग्ध पाया गया है। जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें छह माह के अंतराल पर लगाए जाने वाले इंजेक्शन को कागजों में एक ही मरीज को एक माह के भीतर चार से पांच बार लगाए जाने का उल्लेख किया गया है। इससे दवा वितरण और बिलिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि फरवरी और मार्च 2026 के दौरान संबंधित दवाओं की खपत अचानक बढ़कर 40 से 45 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई, जबकि पूर्व अवधि के आंकड़ों की तुलना में यह वृद्धि असामान्य मानी जा रही है। इसी आधार पर विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।

प्रारंभिक ऑडिट में बिलों, प्रिस्क्रिप्शन और दवा वितरण से जुड़े दस्तावेजों के मिलान के दौरान कई विसंगतियां सामने आईं। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में दवाओं और इंजेक्शनों के उपयोग संबंधी अभिलेख वास्तविक चिकित्सा आवश्यकता से मेल नहीं खाते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए कुलपति की ओर से पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो रिकॉर्ड, भुगतान, दवा खपत और मरीजों के उपचार संबंधी दस्तावेजों की गहन पड़ताल करेगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो यह मामला न केवल वित्तीय गड़बड़ी, बल्कि मरीजों के उपचार और दवा प्रबंधन प्रणाली की पारदर्शिता से भी जुड़ा बड़ा मुद्दा साबित हो सकता है।

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