उत्तर प्रदेश पुलिस की बड़ी साइबर पहल: CFMC और 1930 हेल्पलाइन के स्टैंडअलोन 2.0 केंद्र का शुभारंभ
लखनऊ Jun 01, 2026 at 10:10 PM , 51साइबर ठगी पर त्वरित कार्रवाई के लिए बढ़ेगी क्षमता, ‘गोल्डन मिनट्स’ में धनराशि फ्रीज कर बचाए जाएंगे पीड़ितों के पैसे
लखनऊ। साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और साइबर ठगी के पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साइबर अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति और अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की प्राथमिकताओं के अनुरूप रविवार को कल्ली पश्चिम स्थित पुलिस लाइन, लखनऊ में “साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC)” तथा 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन के नवीन “स्टैंडअलोन 2.0” केंद्र का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश Rajeev Krishna ने डीजी साइबर क्राइम B. K. Singh की उपस्थिति में किया। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक Pankaj Kumar ने पुलिस महानिदेशक की उपस्थिति में पूर्ण विकसित साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC) का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के कई प्रमुख प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, बैंक ऑफ बड़ौदा तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। कार्यक्रम में साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
अपने संबोधन में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि लगभग दस माह पूर्व साइबर मुख्यालय में 30-सीटर साइबर कॉल सेंटर और साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर की प्रारंभिक इकाई स्थापित की गई थी। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब व्यवस्था का विस्तार करते हुए अतिरिक्त 30-सीटर साइबर कॉल सेंटर और पूर्ण विकसित CFMC शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है। पूर्व में स्थापित कॉल सेंटर ने शिकायतों के निस्तारण और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को बढ़ाया था, लेकिन बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सेवा क्षमता का विस्तार आवश्यक हो गया था। नई व्यवस्था के लागू होने से शिकायतों के त्वरित निस्तारण और धनराशि को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।
डीजीपी ने बताया कि पूर्ण विकसित CFMC के माध्यम से साइबर ठगी से संबंधित धनराशि को तत्काल फ्रीज कराने, लियन राशि बढ़ाने और पीड़ितों की रकम सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को और सशक्त बनाया जाएगा। इससे साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार किया जा सकेगा तथा वित्तीय नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
प्रदेशवासियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में केवल “गोल्डन ऑवर” ही नहीं बल्कि “गोल्डन मिनट्स” भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जैसे ही किसी व्यक्ति को साइबर धोखाधड़ी की जानकारी मिले, उसे तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते धनराशि फ्रीज कराकर नुकसान को कम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम, नियंत्रण और नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही CFMC और विस्तारित साइबर कॉल सेंटर की स्थापना में डीजी साइबर क्राइम, डीआईजी साइबर क्राइम तथा साइबर मुख्यालय के अधिकारियों और कर्मियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि RBI, बैंकिंग संस्थानों और साइबर पुलिस के बीच यह समन्वित व्यवस्था प्रदेश के नागरिकों को साइबर ठगी से सुरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि CFMC और 1930 हेल्पलाइन के विस्तारित स्वरूप से उत्तर प्रदेश में साइबर वित्तीय अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई की गति और प्रभावशीलता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को पहले से अधिक त्वरित राहत मिल सकेगी।































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