पीडब्ल्यूडी में तबादला नीति पर ‘सेटिंग’ का साया! 20-22 साल से जमे जूनियर इंजीनियरों के तबादले रोकने की कोशिशों से मचा हड़कंप
लखनऊ May 31, 2026 at 12:12 PM , 79लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में तबादला सत्र 2026-27 के दौरान जूनियर इंजीनियरों के स्थानांतरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आ रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मानव सम्पदा पोर्टल पर प्रदेशभर से करीब 400 जूनियर इंजीनियरों ने तबादले के लिए आवेदन किया है, लेकिन लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कुछ अधिकारियों के तबादले को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड-2 (सीडी-2) में तैनात कई जूनियर इंजीनियर पिछले 20 से 22 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। तबादला सूची में शीर्ष 20 में शामिल कुछ इंजीनियरों पर आरोप है कि वे बिचौलियों और प्रभावशाली संपर्कों के जरिए अपना स्थानांतरण रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं।
विभागीय जानकारों का कहना है कि प्रदेश सरकार की तबादला नीति के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की एक ही स्थान पर लंबी अवधि तक तैनाती को हतोत्साहित किया जाता है। नियमों के तहत निर्धारित अवधि पूरी होने पर स्थानांतरण किया जाना चाहिए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता बनी रहे। इसके बावजूद वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों की मौजूदगी कई सवाल खड़े कर रही है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में यदि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों द्वारा तबादला प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, तो यह शासन की मंशा और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती माना जा सकता है।
सूत्रों का दावा है कि तबादला सूची में शामिल कुछ नाम ऐसे हैं जो निर्धारित अवधि से कहीं अधिक समय से एक ही खंड में कार्यरत हैं। अब निगाहें शासन और विभागीय उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि वे तबादला नीति को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से लागू करते हुए ऐसे मामलों की जांच कराते हैं या नहीं।































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