*नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन खरीफ अभियान-2026 में शामिल हुए कृषि मंत्री*
लखनऊ May 29, 2026 at 08:14 PM , 4*उत्तर प्रदेश खरीफ अभियान 2026: जलवायु परिवर्तन और कम मानसून की चुनौतियों से निपटने हेतु विशेष रणनीति तैयार**
**धान की खेती में डीएसआर तकनीक को व्यापक स्तर पर मिलेगा बढ़ावा; जल संरक्षण और कम लागत से बढ़ेगी उत्पादकता**
**दलहन, तिलहन और मिलेट्स के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए किसानों को निःशुल्क मिनीकिट और उन्नत बीज होंगे उपलब्ध**
*लखनऊ- 29 मई, 2026*
आज पूसा, नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार, श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन "खरीफ अभियान-2026" (28-29 मई) का समापन हुआ। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में खरीफ फसलों की रणनीतियों, उन्नत कृषि तकनीकों और किसानों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने सहभागिता कर आगामी खरीफ सीजन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ अभियान 2026 को जलवायु परिवर्तन और संभावित कमजोर मानसून की चुनौतियों के दृष्टिगत एक विशेष रणनीति के साथ प्रारम्भ किया है। प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को मौसम आधारित कृषि तकनीकों, जल संरक्षण उपायों तथा दलहन एवं तिलहन आधारित खेती की पद्धतियों को अपनाने हेतु प्रोत्साहित करना है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी खाद्यान्न उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकें।
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा वर्ष 2026 में सामान्य से कम मानसून और एल-नीनो प्रभाव के कारण अनियमित वर्षा की आशंका व्यक्त की गई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार धान की खेती के लिए 'डीएसआर' (सीधी बुवाई) तकनीक को व्यापक रूप से बढ़ावा दे रही है। इस पद्धति से पारम्परिक रोपाई की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत जल की बचत होती है और फसल भी 15 से 20 दिन पहले तैयार हो जाती है, जिससे रबी की फसल के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
खरीफ तैयारियों को लेकर कृषि विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा किसानों को समय से प्रमाणित बीज, उर्वरक और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर तक किसान गोष्ठियों का आयोजन कर किसानों को सूखा प्रबन्धन, फसल विविधीकरण और मृदा संरक्षण की जानकारी दी जा रही है। केंद्र सरकार के 'खेत बचाओ' अभियान के तहत किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।
प्रदेश को दलहन, तिलहन और मिलेट्स उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को निःशुल्क मिनीकिट और अनुदानित बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के पास उन्नतशील बीज, उर्वरक और कृषि रक्षा रसायनों की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों से अपील की गई है कि वे इन सुविधाओं और नवीन तकनीकों का लाभ उठाकर अपनी फसल की उत्पादकता बढ़ाएं और स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं।






























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