सात साल की मासूम की तेंदुए के हमले में मौत, परिजनों का शव रखकर प्रदर्शन

लखीमपुर खीरी , 102

निघासन खीरी।
निघासन तहसील क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब बेलरायां वन रेंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत सिधौना के फूटहा फार्म में तेंदुए के हमले में सात वर्षीय मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने बच्ची का शव घर पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और अपनी मांगों को लेकर डट गए। घटना से पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार बेहद गरीब और विषम परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहा है। लगभग 70 वर्ष की उम्र में पिता को यह इकलौती संतान मिली थी। बताया जा रहा है कि पिता ने तीन शादियां की थीं, जिनमें से दो पत्नियों का पहले ही निधन हो चुका है। लंबे इंतजार के बाद तीसरी पत्नी से इस बच्ची का जन्म हुआ था, लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। बच्ची की मां गूंगी है और इस गहरे सदमे को बयां करने में भी असमर्थ है, जिससे परिवार की पीड़ा और अधिक मार्मिक हो गई है।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। डीएफओ कीर्ति चौधरी, क्षेत्राधिकारी शुभम कुमार तथा उपजिलाधिकारी राजीव निगम ने मौके का जायजा लिया। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पढुआ, निघासन, पलिया और सिंगाही थानों की भारी पुलिस फोर्स तैनात रही।
मौके पर किसान संगठन के नेता जसपाल सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अमनदीप सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी लोग परिजनों के समर्थन में धरने पर बैठ गए और उनकी मांगों को पूरा कराने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाते रहे। परिजन अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। उनका कहना है कि उन्हें तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए तथा क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तेंदुए के आतंक से स्थायी रूप से निजात दिलाई जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से जंगली जानवरों का आतंक बना हुआ है, लेकिन वन विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है। लोग अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर महसूस कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से परिजनों को हर संभव सहायता और कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन परिजन लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। देर शाम तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
यह घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है, जिस पर तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

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