मुख्य सचिव के नाम पर ठगी करने वाले तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार
अन्य खबरे Oct 24, 2020 at 07:36 PM , 389लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी की फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह को मथुरा के गोवर्धन से पकड़ा है। एसटीएफ ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक किशोर भी शामिल है। गिरोह फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोगों को मुसीबत में होने के झूठे संदेश भेजता था और मदद के बहाने रकम ऐंठता था। गिरोह ने मुख्य सचिव के नाम पर भी कई लोगों से धन उगाही करने का प्रयास किया था।एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि शासन स्तर से मुख्य सचिव का फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर ठगी का प्रयास किए जाने की शिकायत की गई थी। मुख्य सचिव कार्यालय के उपनिदेशक दिनेश कुमार गुप्ता की ओर से इस मामले में लखनऊ के साइबर क्राइम थाने में 10 सितंबर को धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। एसटीएफ ने मामले में फेसबुक कंपनी व सर्विलांस की मदद से की गई छानबीन के आधार पर मथुरा के गोवर्धन से आरोपित शराफत उर्फ काला तथा सुखदीन खान को गिरफ्तार किया गया है। मामले में आरोपित एक किशोर को भी पकड़ा गया है, जिसे नोटिस देकर छोड़ दिया गया।आरोपितों से पूछताछ में सामने आया कि वे लोगों की फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर अथवा फेसबुक प्रोफाइन हैक कर उनकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोगों के नाम से मैसेन्जर के जरिए संदेश भेजते थे। इन संदेशों में खुद को किसी न किसी मुसीबत में घिरा बताकर आर्थिक मदद की मांग की जाती थी। इसके बाद फर्जी नाम-पतों पर खोले गए ई-खातों में आनलाइन रकम जमा कराई जाती थी।गिरोह का सरगना सराफत उर्फ काला है, जो कई वर्षों से इसी तरह साइबर ठगी कर रहा था। आरोपित साबिर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाने व फेसबुक प्रोफाइल हैक करने में मास्टर है। सराफत ने मुख्य सचिव के नाम पर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर उनकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल कई लोगों को मदद के लिए मैसेज कर धन की मांग किए जाने की बात स्वीकार की है।मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र को साइबर अपराधियों का गढ़ माना जाता है। एएसपी के अनुसार आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि साबिर ने मडौरा व देवसेरस गांव के 100 से 150 लोगों को फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर ऑनलाइन ठगी के काले कारोबार में लगा रखा है। यह भी बताया कि जिन लोगों की फेसबुक आइडी व पासवर्ड एक ही होते हैं, उनके अकाउंट ज्यादा आसानी से हैक हो जाते हैं। यह भी बताया कि ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले पेटीएम, फोनपे, गूगलपे व अन्य यूपीआइ अकाउंट गांव के आजाद, तौफीक, सलीम व कुछ अन्य युवक संचालित करते हैं। जो उनके खातों में आने वाली रकम का तीस प्रतिशत हिस्सा बतौर कमीशन काटकर शेष रकम का भुगतान कर देते हैं।गिरोह ठगी में इंटरनेट कॉलिंग व अन्य कामों के लिए असीम, उड़ीसा, महाराष्ट्र व अन्य राज्यों से लाए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। गांव के कुछ युवक दूसरे राज्यों से फर्जी नाम पतों पद लाकर साइबर अपराधियों को 1000 रुपये तक में बेचते हैं।आरोपितों से पूछताछ में यह भी सामने आया कि उनके अन्य साथी भी साइबर फ्राड में सक्रिय हैं। गांव में पुलिस जब उन्हें पकड़ने आती है तो कई बार ग्रामीण मिलकर पुलिस टीम पर हमला भी बोल देते हैं। पुलिस का दबाव बढ़ने पर वे जंगल में छिप जाते हैं अथवा राजस्थान या हरियाणा में शरण ले लेते हैं।



























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