अदभुत परम्परा: शवों को खाने की परम्परा

हेडलाइंस , 569

आज हम जो  समाचार आपको देने जा रहे हैं हो सकता है उस पर आप सहसा विश्वास ना करें. क्योंकि यह बहुत आश्चर्य कर देने वाला समाचार है . दुनिया में इंसानों की  कई ऐसी जनजातियाँ हैं, जिसके बारे में हम आम दुनिया के लोग बेहद अनजान हैं. ना सिर्फ उन्हें, बल्कि उनके रीति-रिवाज, परंपराएं और संस्कृति के बारे में भी हमें बहुत अधिक  नहीं मालूम होता. उनके मान्यताओं के बारे में जानने के बाद कोई भरोसा भी नहीं कर पाएगा कि आखिर यह प्रजाति ऐसा क्यों करती है.
साउथ अमेरिका के ब्राजील और वेनेजुएला में यानोमामी जनजाति पाईजाती है,जोकि यनम या सीनेमा के नाम से जाने जाते हैं. यह जनजाति आजकल के आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण से बिलकुल अछूते हैं .यह जनजाति  अपनी आदिमसंस्कृति व परंपराओं का अनुपालन करती हैं. यही वजह है कि यह जनजाति अपने ही तरीके से रहना पसंद करते है. अपना जीवन यापन अपने तरीके से ही करते हैं.
इस जनजाति में अंतिम संस्कार करने का तरीका बड़ा ही अद्भुत और अजीबोगरीब है. एंडो-केनिबलवाद कहे जाने वाली इस परंपरा के अंतर्गत यह जनजाति अपनी ही जनजाति के मृतकों के मांस खाने की अनोखी प्रथाको ज़िंदा रखे है.
अमेजन वर्षावन में रहने वाले यानोमामी जनजाति का मानना है कि मौत के बाद शरीर के आत्मा को संरक्षित रखने की जरूरत होती है. उनका मानना है कि आत्मा को तभी शांति मिल सकती है, जब उसकी लाश पूरी तरह से जल जाए और उनके लाश को जीवित रिश्तेदारों द्वारा खाया जाए. मृतकों के पारंपरिक दफन प्रक्रिया के उलट, यह जनजाति शव को जलाते हैं और जले हुए शरीर पर मुस्कान के साथ उनके चेहरे को पेंट कर देते हैं. इतना ही नहीं, ये नाचते गाते हैं और रिश्तेदार की मौत पर रोते हुए अपने दुख को प्रगट करते हैं


एक  रिपोर्ट के मुताबिक, इस जनजाति में किसी शख्स की मौत हो जाती है, तो उसके शव को पत्तों और दूसरी चीजों से ढक कर रख दिया जाता है. इसके बाद जो शरीर बच जाता है उसे जला दिया जाता है. इसके बाद बची राख का सूप बनाकर जनजाति के लोग पीते हैं. ऐसा वह अपनी परंपराओं की वजह से करते हैं.

Related Articles

Comments

Back to Top