_*कोरोना की मार: मुस्लिम रोजेदारों ने किया कोरोना संक्रमित महिला का अंतिम संस्कार, नहीं पहुंचे परिजन*

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लखनऊ।

_मरने के बाद अपनों के साथ-साथ मोहल्ले वालों ने छोड़ा साथ_

_रिश्तेदार नातेदार, पड़ोसी सबने फेरी आंखे ऐसे में शव उठाने और अंतिम संस्कार कराने पहुंचे तीन रोजेदार_

_कोरोना महामारी का अब सामाजिक दुष्प्रभाव दिख रहा है_

_समाज से मानवता खत्म हो रही है_

_हालत यह है कि कोरोना से मौत होने के बाद उनके अपने ही अंतिम संस्कार से बच रहे हैं_

_सांप्रदायिक सौहाद्र और भाईचारे की मिसाल_

_इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। इमदाद ग्रुप लीडर_

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