वैश्विक संकटकाल में भारत की अपेक्षा अन्य देशों की दशा और दयनीय _
परिवेश Apr 24, 2021 at 11:32 AM , 648अमेरिका में भारत से दुगने लोगों को कोरोना हो चुका है और वहां भारत से तीन गुणा अधिक मृत्यु हुई है। ब्राजील में लगभग भारत जितने ही मामले हैं, मृत्यु भारत से ढाई गुणा ज्यादा। फ्रांस में पचपन लाख मामलों में ही एक लाख दो हजार लोगों की मृत्यु हो चुकी है। रूस में चालीस लाख से कुछ ज्यादा मामले हैं और मृत्यु एक लाख से अधिक हो चुकी है। ब्रिटेन में पैंतालीस लाख मामलों में ही एक लाख सत्ताईस हजार मौत हो चुकी है।
यह एक छोटा सा आंकड़ा है। जो सिद्ध करता है कि महामारी से लड़ने में सभी नाकाम हैं। आज से नहीं, हमेशा हमेशा से। ध्यान रहे ये सभी देश बहुत आधुनिक और विकसित हैं। अमेरिका का भूक्षेत्र भारत से तीन गुणा बड़ा है और जनसंख्या मात्र पैंतीस करोड़। आधुनिकता में हमसे मीलों आगे है पर हाल देख लीजिए। यूरोप संपन्न है। आबादी कम है। विकसित हैं पर दुर्दशा देखिए। उसी तरह रूस और ब्राजील की स्थिति है। ये सब देश लंबे समय से विकसित हैं। एक व्यवस्था से चलने वाले देश हैं।
भारत में मोदी की सरकार साढ़े छह साल पुरानी है। जिसके पास साठ वर्ष की सड़ियल लंतरानी है। अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का पहाड़ है। गद्दारों की भरमार है। इन साठ वर्षों में पचास साल कांग्रेस की सरकार रही। उसने देश में एक एम्स बनाया। और आज उनका चिल्लाना सुनिए...
भारत इससे भी बेहतर स्थिति में रहता। बहुत बेहतर स्थिति में होता अगर आदरणीय ठाकरे साहब और दिल्ली वाले महापुरुष कुछ कर पाने की क्षमता रखते। जिन लोगों ने केवल मोदी को गरियाया है केवल झूठ बोला, वही आज इस आपदा को बढ़ाने में सबसे आगे हैं।
हम जैसे लोगों को भक्त कहकर तुच्छ समझने वाले और मोदी का उपहास करने वाले विद्वानों से कहना चाहता हूं कि आपकी विद्वत्ता का बड़ा सम्मान है। वरेण्य हैं आप। पर हमें नीच न समझिए। आप को यह अंदाजा ही नहीं है कि अगर कांग्रेसी सरकार रही होती तो भारत किस विकराल स्थिति में होता। भारत में लगभग एक प्रतिशत मृत्यु दर है। यहां एक करोड़ बासठ लाख मामले अब तक आए हैं। जिसमें से एक करोड़ छत्तीस लाख लोग ठीक हो चुके हैं। करीब चौबीस लाख एक्टिव केस हैं इस समय। आजतक कुल मृत्यु दर 1.15 प्रतिशत है।
जिन्होंने अपने परिजन खोए हैं या अस्पतालों की अव्यवस्था का कष्ट झेला है, उन सबसे सौ-सौ बार क्षमा मांगते हुए केवल यही कह सकता हूं कि देश को मरघट मसान बताने वाले, मोदी पर इस हालत की जिम्मेदारी डालने वाले, उन्हें दोषी ठहराने वाले झूठे और बेईमान हैं।
एक सौ पैंतीस करोड़ की जनसंख्या वाले भारत में एक लाख छियासी हजार लोगों की दुखद मृत्यु से पूरा देश मरघट बन गया है!!
अंत में एक बात और, जैसे-जैसे वैक्सीन की ड्राइव आगे बढ़ती जाएगी। भारत सुरक्षित होता जाएगा। वैक्सीन के लिए आगे आएं। टीका ही इसका तोड़ है।
प्रफुल्ल सिंह "बेचैन कलम"
युवा लेखक/स्तंभकार/साहित्यकार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
सचलभाष/व्हाट्सअप : 6392189466
ईमेल : prafulsingh90@gmail.com































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