अद्भुत मंदिर : सफ़ेद चूहों का मंदिर
हेडलाइंस Apr 21, 2021 at 11:35 PM , 848भारत अद्भुत प्रकार के मंदिरों का देश है . यहाँ ऐसे ऐसे मंदिर है जिनके स्थापत्य दुनियां में कहीं नहीं मिलते. जिनकी विचित्रताए देख अप दांग रह जायेंगे . आज हम एक ऐसे ही मंदिर का बारे में बताने जा रहे हैं जो कि सफ़ेद चूहों का मंदिर कहलाता है . जी हाँ हम बात करने जा रहे है करणी माता के मंदिर के बारे में . करणी माता का मन्दिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर है जो राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है. इसमें देवी करणी माता की मूर्ति स्थापित है. यह बीकानेर से 30 किलोमीटर दक्षिण दिशा में देशनोक में स्थित है. करणी माता का जन्म चारण कुल में हुआ यह मन्दिर सफ़ेद चूहों का मन्दिर भी कहलाता है. मन्दिर मुख्यतः सफेद चूहों के लिए प्रसिद्ध है. इस पवित्र मन्दिर में लगभग 20000 सफेद चूहे रहते हैं. मंदिर के मुख्य द्वार पर संगमरमर पर नक्काशी को भी विशेष रूप से देखने के लिए लोग यहां आते हैं. चांदी के किवाड़, सोने के छत्र और चूहों के प्रसाद के लिए यहां रखी चांदी की बड़ी परात भी दर्शनीय है.
श्रद्धालुओं का मत है कि करणी देवी साक्षात मां जगदम्बा की अवतार थीं. अब से लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पूर्व जिस स्थान पर यह भव्य मंदिर है, वहां एक गुफा में रहकर मां अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना किया करती थीं. यह गुफा आज भी मंदिर परिसर में स्थित है. मां के ज्योर्तिलीन होने पर उनकी इच्छानुसार उनकी मूर्ति की इस गुफा में स्थापना की गई. बताते हैं कि मां करणी के आशीर्वाद से ही बीकानेर और जोधपुर शहर की स्थापना हुई थी.
संगमरमर से बने मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है. मुख्य दरवाजा पार कर मंदिर के अंदर पहुंचते ही चूहों की धमाचौकड़ी देख मन दंग रह जाता है. चूहों की बहुतायत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पैदल चलने के लिए अपना अगला कदम उठाकर नहीं, बल्कि जमीन पर घसीटते हुए आगे रखना होता है. लोग इसी तरह कदमों को घसीटते हुए करणी मां की मूर्ति के सामने पहुंचते हैं.
चूहे पूरे मंदिर प्रांगण में मौजूद रहते हैं. वे श्रद्धालुओं के शरीर पर कूद-फांद करते हैं, लेकिन किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते. चील, गिद्ध और दूसरे जानवरों से इन चूहों की रक्षा के लिए मंदिर में खुले स्थानों पर बारीक जाली लगी हुई है. ऐसी मान्यता है कि किसी श्रद्धालु को यदि यहां सफेद चूहे के दर्शन होते हैं, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है. नवरात्रि पर्व में लाखो श्रद्धालु मंदिर के दर्शनार्थ आते हैं .
करणी मां की कथा एक सामान्य ग्रामीण कन्या की कथा है, लेकिन उनके संबंध में अनेक चमत्कारी घटनाएं भी जुड़ी बताई जाती हैं, जो उनकी उम्र के अलग-अलग पड़ाव से संबंध रखती हैं. बताते हैं कि संवत 1595 की चैत्र शुक्ल नवमी गुरुवार को माता करणी ज्योर्तिलीन हुईं, तभी से यहाँ श्री करणी माता जी की सेवा पूजा होती चली आ रही है.
करणी जी का अवतरण चारण कुल में वि. सं. 1444 अश्विनी शुक्ल सप्तमी शुक्रवार तदनुसार 20 सितम्बर, 1387 ई. को सुआप यानि जोधपुर में मेहाजी किनिया के घर में हुआ था. करणीजी ने जनहितार्थ अवतार लेकर तत्कालीन जागल प्रदेश को अपनी कार्यस्थली बनाया. करणीजी ने ही राव बीका को जगल प्रदेश में राज्य स्थापित करने का आशीर्वाद दिया था. करणी माता ने मानव मात्र एवं पशु-पक्षियों के संवर्द्धन के लिए देशनोक में दस हजार बीघा ओरण यानी पशुओं के चारा गाह की स्थापना की थी. करणी माता ने पूगल के राव शेखा को मुल्तान जो कि वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित हैं के कारागृह से मुक्त करवा कर उसकी पुत्री रंगकंवर का विवाह राव बीका से संपन्न करवाया था. करणी जी की गायों का चरवाहा दशरथ मेघवाल था. डाकू पेंथड़ और पूजा महला से गायों की रक्षार्थ जूझ कर दशरथ मेघवाल ने अपने प्राण गवां दिए थे. करणी माता ने डाकू पेंथड़ व पूजा महला का अंत कर दशरथ मेघवाल को पूज्य बनाया जो सामाजिक समरसता का प्रतीक है. कहते है करणी माता 151 वर्ष जिन्दा रहकर 23 मार्च 1538 को ज्योतिर्लीन हुई थी.































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