IDBI बैंक में सरकारी हिस्सेदारी को लेकर वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण, 2003 में प्रस्तावित संशोधन कानून का हिस्सा नहीं बना

जनपत की खबर , 24

**नई दिल्ली।** IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2003 के विधायी घटनाक्रमों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि मीडिया के कुछ वर्गों में इस मुद्दे पर प्रकाशित रिपोर्टों के संदर्भ में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
 
वित्त मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय बजट 2003 पर चर्चा और IDBI (निरसन) अधिनियम, 2003 को लेकर संसद में हुई बहस के दौरान सरकार की हिस्सेदारी में कमी को सीमित करने के उद्देश्य से एक संशोधन प्रस्तावित किया गया था।
 
हालांकि, यह संशोधन अंततः अस्वीकार कर दिया गया और इसे अधिनियमित कानून में शामिल नहीं किया गया। इस प्रकार, वर्ष 2003 में सरकार की हिस्सेदारी में कमी पर सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव कानून का हिस्सा नहीं बन पाया।
 
**क्या है स्पष्टीकरण का महत्व?**
 
वित्त मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य IDBI बैंक में सरकारी हिस्सेदारी से जुड़े ऐतिहासिक विधायी घटनाक्रमों को लेकर स्थिति स्पष्ट करना है। मंत्रालय ने रेखांकित किया है कि किसी संशोधन का प्रस्तावित होना और उसका कानून में शामिल होना दो अलग-अलग बातें हैं।
 
इसलिए, वर्ष 2003 के घटनाक्रमों का उल्लेख करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि सरकार की हिस्सेदारी में कमी को सीमित करने वाला प्रस्तावित संशोधन अंततः कानून में शामिल नहीं हुआ था।

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