जमाखोरों ने शुरु की जरूरी सामानों की कालाबाजारी

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लखीमपुर खीरी।  कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच 35 घंटा के लॉक डाउन की बात पर पान मसाला एवं गुटखा,तम्बाकू उत्पाद के थोक व्यापारियों ने जमाखोरी एवं कालाबाजारी करना शुरू कर दिया। गुटका को अपने गोदामों घरों एवं पड़ोस के घरों में छिपा कर रखना जमाखोरों ने शुरु कर दिए। पास की दुकानों चाय दुकानों में गुटखा बेचने वाले छोटे दुकानदारों का कहना है कि रु 150 से ₹140 में बिकने वाला राजश्री दिलबाग विमल आज बड़े दुकानदारों द्वारा ₹200 से ₹250 में बेचा जा रहा है अधिक दाम में बेंचने के सवाल पर इनका रटा-रटाया जवाब होता है कि ऊपर से ही अधिक कीमत में आया है यदि बिल दिखाने की बात की जाए तो आनाकानी करते हैं छोटे और चिल्लर दुकानदारों का कहना है कि बढ़े दामों में गुटका खरीदने से मजबूरन हमें भी दाम बढ़ा कर बेंचना पड़ता है उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष गर्मी के मौसम में भी नगर के थोक पान मसाला एवं गुटका विक्रेताओं ने दामों में बढ़ोतरी कर जमाखोरी कर फायदा उठाया था ₹140 में बिकने वाला गुटखा 400 से ₹500 में बेचा जा रहा था एक दो व्यापारियों पर थोड़ी बहुत कार्रवाई भी हुई है लेकिन उससे भी व्यापारी नहीं सुधरे थे दरअसल इन थोक व्यापारियों के मन में डर इसलिए नहीं है यह पुरानी व्यवस्था के चलते लेनदेन करके प्रशासनिक कार्रवाई से बचने की उम्मीद पाले रहते हैं और काफी हद तक उसमें सफल भी हो जाते हैं। 
प्रशासन को तोड़ना होगा इनका भ्रम
जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायत पर यदा-कदा इन व्यापारियों पर प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जाती है लेकिन यह व्यापारी अधिकारी आएंगे तो उनको मना लेंगे इस भावना से ग्रसित हैं और अधिकारियों को लेकर उनके मन में थोड़ा भी डर नहीं रहता है ऐसे में जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों के भ्रम को तोड़ना प्रशासन के लिए बहुत जरूरी हो गया है आपदा में अवसर तलाश कर पान मसाला गुटखा बीड़ी सिगरेट एवं राशन जैसे रोजमर्रा की वस्तुओं को दबाकर बेचने वाले पर कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस पर कुछ ध्यान दे सकता है या यह कालाबाजारी करने वाले अपने मंसूबे में सफल होते रहेंगे!!

 

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