**एयरपोर्ट और शहीद पथ से सटी हजारों करोड़ की वक्फ भूमि पर उठे सवाल, परिजनों ने CBI, SIT, ED और आयकर जांच की मांग की
जनपत की खबर Jun 02, 2026 at 06:20 PM , 26*366 बीघा वक्फ अच्छे मिर्ज़ा संपत्ति के आय-व्यय, भूमि प्रबंधन और मुकदमों की स्वतंत्र जांच की मांग; मुख्यमंत्री को भेजा गया विस्तृत प्रार्थना पत्र*
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में स्थित वक्फ अच्छे मिर्ज़ा संख्या I-987 (अलल औलाद) की लगभग 366 बीघा बहुमूल्य भूमि को लेकर नया विवाद सामने आया है। वक्फ के परिजनों, वंशजों और लाभार्थियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि एयरपोर्ट, बिजनौर रोड और शहीद पथ से सटी यह वक्फ भूमि वर्तमान में हजारों करोड़ रुपये मूल्य की हो चुकी है। परिजनों का कहना है कि यह संपत्ति करीब एक सदी पूर्व शिक्षा, समाज सेवा, गरीबों, यतीमों, बेवाओं और जनकल्याण के उद्देश्य से वक्फ की गई थी, लेकिन वर्तमान में इसके संचालन और प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आय-व्यय और संपत्ति प्रबंधन पर उठे प्रश्न
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा वक्फ को प्रत्यक्ष नियंत्रण में लिए जाने के बाद से वक्फ की आय, व्यय, भूमि प्रबंधन, किराया वसूली, पट्टों के आवंटन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर पारदर्शिता का अभाव रहा है।
परिजनों ने मांग की है कि पिछले वर्षों में भूमि से प्राप्त आय, किराया, पट्टों और अन्य स्रोतों से हुई आमदनी का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि लाभार्थियों को आज तक बैलेंस शीट, ऑडिट रिपोर्ट, बैंक खातों का विवरण, किराया वसूली का रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
मुकदमों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग
प्रार्थना पत्र में वक्फ से संबंधित विभिन्न न्यायालयों में लंबित और निस्तारित मुकदमों की भी स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की गई है। परिजनों का कहना है कि मुकदमों की पैरवी, उनके परिणाम और वक्फ हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी लाभार्थियों तक नहीं पहुंचाई गई।
उन्होंने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि वक्फ की संपत्तियों और हितों की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई और किन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
भूमि का राजस्व और भौतिक सत्यापन कराने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने वक्फ के नाम दर्ज दर्जनों गाटा संख्याओं की राजस्व अभिलेखों से जांच और मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि समस्त भूमि की वास्तविक स्थिति, कब्जे, उपयोग और राजस्व रिकॉर्ड का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाना आवश्यक है।
CBI, SIT, ED और आयकर विभाग से जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों एवं लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, आय-व्यय और संपत्ति प्रबंधन की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा आयकर विभाग जैसी एजेंसियों से भी कराई जानी चाहिए।
इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की परिकल्पना का भी उल्लेख
प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि समाज के बुजुर्गों की इच्छा थी कि इस विशाल वक्फ भूमि पर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की यूनिवर्सिटी स्थापित की जाए, जहां आधुनिक और धार्मिक शिक्षा का समन्वित केंद्र विकसित हो सके तथा वक्फ की आय का उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए किया जाए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह सपना आज तक अधूरा है।
जनहित और वक्फ हित में कार्रवाई की अपील
वक्फ अच्छे मिर्ज़ा के परिजनों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराकर सत्य को सामने लाया जाए। उनका कहना है कि यह केवल भूमि का मामला नहीं, बल्कि वक्फ की पवित्रता, लाभार्थियों के अधिकारों और समाज के कमजोर वर्गों के हितों से जुड़ा विषय है। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
हालांकि, इस मामले में जिन संस्थाओं और पक्षों पर सवाल उठाए गए हैं, उनकी ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।































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