डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापन पर NMC की सख्ती, भ्रामक दावों पर लगेगी रोक
जनपत की खबर Oct 08, 2026 at 08:36 AM , 13सोशल मीडिया से लेकर AI प्रचार तक नए नियमों का दायरा; मरीजों की तस्वीरों और फर्जी प्रशंसापत्रों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध
नई दिल्ली। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के विज्ञापन एवं सोशल मीडिया प्रचार को लेकर नई नैतिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं के नाम पर होने वाले भ्रामक प्रचार पर अंकुश लगाना और मरीजों के हितों की रक्षा करना है। नई गाइडलाइन 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की जानकारी सामने आई है।
‘बेस्ट’ और ‘नंबर-1’ जैसे दावों पर रोक
नए नियमों के तहत डॉक्टरों और अस्पतालों को ‘बेस्ट’, ‘नंबर-1’, ‘टॉप’, ‘मोस्ट ट्रस्टेड’ और ‘गारंटीड इलाज’ जैसे भ्रामक या अप्रमाणित दावों के जरिए मरीजों को आकर्षित करने की अनुमति नहीं होगी। सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट, व्हाट्सऐप, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार प्रचार सामग्री भी नियमों के दायरे में आएगी।
मरीजों की निजता से समझौता नहीं
गाइडलाइन के अनुसार, मरीजों की तस्वीरों, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, प्रशंसापत्रों और उपचार के परिणामों का प्रचार के लिए अनुचित इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। AI के माध्यम से नकली प्रशंसापत्र, बदली हुई तस्वीरें या भ्रामक चिकित्सकीय परिणाम तैयार करना भी प्रतिबंधित होगा।
डिस्काउंट और उपहार देकर मरीज जुटाने पर रोक
डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों को डिस्काउंट, कूपन, कैशबैक, उपहार, रेफरल भुगतान अथवा मुफ्त प्रक्रियाओं के जरिए मरीजों को आकर्षित करने जैसी प्रचार गतिविधियों से बचना होगा। इसके साथ ही सर्च इंजन या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी रैंकिंग को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए भुगतान करने पर भी रोक लगाई गई है।
तथ्यात्मक जानकारी देने की अनुमति
नए नियमों में स्वास्थ्य जागरूकता, जनस्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी तथ्यात्मक जानकारी साझा करने की अनुमति दी गई है। अस्पताल अपनी वेबसाइट पर विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, शुल्क, डॉक्टरों की योग्यता और विशेषज्ञता से जुड़ी सत्यापित जानकारी दे सकेंगे। हालांकि, इस जानकारी का इस्तेमाल भ्रामक या अनुचित व्यावसायिक प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों और संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसमें चेतावनी, पंजीकरण निलंबन तथा लागू कानूनों के तहत अन्य दंडात्मक कार्रवाई शामिल हो सकती है।
नई गाइडलाइन का प्रमुख उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना, मरीजों को भ्रामक दावों से बचाना और डॉक्टर-मरीज के बीच विश्वास बनाए रखना है।






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