वाराणसी में सरकारी ‘अवैध भवन’ का बड़ा खुलासा: बिना नक्शा बने PuVVNL कार्यालय पर कार्रवाई ठप, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी!

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वाराणसी। शिवपुर क्षेत्र के मिर्जा-मिश्रीपुर में बना पांच मंजिला भवन इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गया है। यह भवन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PuVVNL) का प्रबंध निदेशक कार्यालय है, जिस पर बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कराने के गंभीर आरोप लगे हैं।
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब PuVVNL ने स्वयं 3 मार्च 2023 को विधान परिषद में लिखित रूप से स्वीकार किया कि भवन का विस्तार बिना नक्शा स्वीकृत कराए किया गया है और विभागीय परिसर के भीतर नक्शा पास कराने की आवश्यकता नहीं समझी गई। हालांकि बाद में स्थिति स्पष्ट होने पर वाराणसी विकास प्राधिकरण में शमन मानचित्र प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद वाराणसी विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए करीब 1.33 करोड़ रुपये का शमन शुल्क जमा करने का नोटिस जारी किया। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि डेढ़ साल से अधिक समय बीतने के बावजूद यह शुल्क अब तक जमा नहीं किया गया है, न ही भवन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई है।
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब इस पूरे प्रकरण से जुड़े एक अभियंता को, नियमों की अनदेखी के आरोपों के बावजूद, पदोन्नति में विशेष छूट देते हुए अधीक्षण अभियंता बना दिया गया। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फायर एनओसी के बिना संचालित भवन
सूत्रों के अनुसार, यह भवन पिछले लगभग तीन वर्षों से बिना फायर विभाग की अंतिम एनओसी के संचालित हो रहा है। ऐसे में यदि कोई अग्निकांड होता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना एक बड़ा प्रश्न बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा था कि बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए भवन अवैध हैं और उन्हें शमन शुल्क के जरिए वैध नहीं किया जा सकता, बल्कि ऐसे निर्माणों को ध्वस्त किया जाना चाहिए।
इसके बावजूद वाराणसी में संबंधित विभागों द्वारा न तो भवन को गिराने की कार्रवाई की गई और न ही शमन शुल्क वसूला गया, जिससे न्यायिक आदेशों के पालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
RTI में भी टालमटोल
सूचना का अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए सवालों पर भी स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। जवाब में कहा गया कि “विशेष अधिकारी के निर्देश पर सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती”, जिससे पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
उठते सवाल
शमन शुल्क आखिर कौन जमा करेगा—विभाग या जिम्मेदार अधिकारी?
शुल्क जमा होने पर भी क्या भवन सुरक्षित रहेगा?
बिना फायर एनओसी के संचालन की जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या हो आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में तत्काल सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। वाराणसी विकास प्राधिकरण को नियमों के तहत भवन पर अंतिम कार्रवाई करनी चाहिए, वहीं PuVVNL को भी जवाबदेही तय करनी होगी। दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
यह मामला केवल एक अवैध भवन तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में नियमों की अनदेखी, जवाबदेही की कमी और प्रशासनिक ढिलाई का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

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